
आधुनिक तकनीक से ब्रेन और स्पाइन सर्जरी हुई अब अधिक सुरक्षित: जानिए न्यूरोसर्जरी के बारे में
By Priyambda Sahay
Reviewed by : Ujala Cygnus
August 25, 2026
दशकों तक न्यूरोसर्जरी को बहुत ज़्यादा जोखिम और ठीक होने में लंबा समय लगने वाली प्रक्रिया माना जाता था। लेकिन एडवांस्ड मेडिकल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल ने इस क्षेत्र को पूरी तरह से बदल दिया है। आज, सर्जरी में मरीज़ की चलने-फिरने की क्षमता को बनाए रखने, ज़रूरी न्यूरोलॉजिकल फंक्शन को सुरक्षित रखने और स्वस्थ टिश्यू को कम से कम नुकसान पहुँचाने पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है।
उजाला सिग्नस ब्राइटस्टार हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. कुंज बिहारी सारस्वत आधुनिक न्यूरोसर्जरी तकनीक से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा कि आज न्यूरोसर्जरी किसी बड़े जोखिम वाली सर्जरी नहीं, बल्कि मेडिकल क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल की एक बेहतरीन मिसाल बन चुकी है। डिजिटल मैपिंग टूल्स, रोबोटिक असिस्टेंट और बहुत छोटे उपकरणों के आने से, सर्जनों को अब बड़े चीरे लगाने या सिर्फ़ अपनी आँखों पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है। इसके बजाय, वे GPS जैसी मिलीमीटर-लेवल की सटीकता के साथ इंसानी नर्वस सिस्टम के नाज़ुक रास्तों पर काम कर सकते हैं।
मरीज़ों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध तकनीक-
मिनिमली इनवेसिव तकनीक
: सर्जरी वाली जगह तक पहुँचने के लिए छोटे "की-होल" चीरे और खास ट्यूब का इस्तेमाल करना, ताकि बड़ी मांसपेशियों या स्वस्थ टिश्यू को काटना न पड़े।
हाई-डेफिनिशन इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन
: रियल-टाइम, GPS जैसी 3D इमेजिंग (जैसे फंक्शनल MRI और CT स्कैन) का इस्तेमाल करना, जो सर्जरी के सुरक्षित रास्तों को मिलीमीटर तक मैप करती है।
रोबोटिक-असिस्टेड सटीकता
: सर्जनों द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्थिर रोबोटिक हैंड्स का इस्तेमाल करके स्पाइनल स्क्रू जैसे हार्डवेयर को सटीकता के साथ लगाना।
लगातार न्यूरो-मॉनिटरिंग
: ऑपरेशन के दौरान नसों और दिमाग की गतिविधि को लाइव ट्रैक करना, और किसी ज़रूरी फंक्शन वाले हिस्से के पास पहुँचने पर तुरंत अलर्ट देना।
कुल मिलाकर, इन सभी नई तकनीकों ने मिलकर उन ऑपरेशन को, जिनसे कभी बहुत डर लगता था, अब सुरक्षित और सफल प्रक्रियाओं में बदल दिया है। इनमें कम ब्लड लॉस, इन्फेक्शन का कम खतरा और मरीज़ बहुत तेज़ी से ठीक होते हैं।
आम शब्दों में
न्यूरोसर्जरी क्या है?
न्यूरोसर्जरी चिकित्सा विज्ञान की वह सुपर-स्पेशियलिटी है, जिसमें मस्तिष्क (Brain), रीढ़ की हड्डी (Spine), स्पाइनल कॉर्ड तथा नसों (Peripheral Nerves) से संबंधित बीमारियों का आधुनिक तकनीकों द्वारा उपचार किया जाता है। इसमें केवल ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि मरीज की जांच, सही सलाह, दवाओं और आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी भी शामिल होती है।
किन बीमारियों का इलाज न्यूरोसर्जन करते हैं?
न्यूरोसर्जन अनेक जटिल बीमारियों का उपचार करते हैं, जैसे—
ब्रेन ट्यूमर
सिर की गंभीर चोट (Head Injury)
ब्रेन हेमरेज
स्लिप डिस्क
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस एवं नस दबना
कमर और गर्दन की रीढ़ की बीमारियां
स्पाइनल ट्यूमर
रीढ़ की हड्डी का फ्रैक्चर
दिमाग में पानी भरना (Hydrocephalus)
जन्मजात मस्तिष्क एवं रीढ़ की विकृतियां
चेहरे की नस का असहनीय दर्द (Trigeminal Neuralgia)
मिर्गी के कुछ जटिल मामलों में सर्जरी
पार्किंसन रोग के चयनित मरीजों में आधुनिक सर्जिकल उपचार
क्या हर मरीज का ऑपरेशन करना पड़ता है?
बिल्कुल नहीं, यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। लगभग 70–80 प्रतिशत मरीजों का इलाज दवाइयों, फिजियोथेरेपी, व्यायाम और जीवनशैली में सुधार से ही सफलतापूर्वक हो जाता है। सर्जरी केवल उन्हीं मरीजों में की जाती है, जिनमें उससे स्पष्ट लाभ मिलने की संभावना हो।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
यदि किसी व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण हों, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें—
लगातार या असहनीय सिरदर्द
अचानक हाथ या पैर में कमजोरी
बार-बार बेहोशी या दौरे पड़ना
बोलने में कठिनाई
शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन
कमर का दर्द जो पैर तक जाए
गर्दन का दर्द जो हाथों तक पहुंचे
चलने में असंतुलन
पेशाब या मल पर नियंत्रण कम होना
क्या स्लिप डिस्क का इलाज बिना ऑपरेशन संभव है?
हाँ, स्लिप डिस्क के अधिकांश मरीज बिना ऑपरेशन के ठीक हो जाते हैं। सही समय पर दवा, फिजियोथेरेपी और उचित व्यायाम से अच्छे परिणाम मिलते हैं। लेकिन यदि नस पर अत्यधिक दबाव हो, पैर में कमजोरी आने लगे या पेशाब पर नियंत्रण नहीं रहे, तो ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।
क्या ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव है?
आज आधुनिक तकनीकों के कारण अधिकांश ब्रेन ट्यूमर का सफल उपचार संभव है। समय पर जांच, सही निदान और विशेषज्ञ द्वारा उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। कई मामलों में माइक्रोस्कोप, न्यूरोनेविगेशन और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों के कारण सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो गई है।
आधुनिक न्यूरोसर्जरी पहले से कितनी बदल चुकी है?
पिछले कुछ वर्षों में न्यूरोसर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। अब हाई-रिजॉल्यूशन MRI, CT स्कैन, ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप, न्यूरोनेविगेशन, एंडोस्कोपिक एवं मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की मदद से अत्यंत जटिल ऑपरेशन भी अधिक सटीक और सुरक्षित ढंग से किए जा रहे हैं। इससे मरीज का दर्द कम होता है, अस्पताल में रहने का समय घटता है और वह जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाता है।
क्या ब्रेन स्ट्रोक में भी न्यूरोसर्जन की भूमिका होती है?
हाँ, ब्रेन स्ट्रोक के कुछ मरीजों में केवल दवा पर्याप्त होती है, जबकि कुछ गंभीर मामलों में मस्तिष्क पर बढ़ते दबाव को कम करने या रक्तस्राव के उपचार के लिए न्यूरोसर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
दिमाग और रीढ़ की बीमारियों से बचने के लिए क्या करें?
उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें।
धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें।
नियमित व्यायाम करें।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें।
कमर और गर्दन की सही मुद्रा बनाए रखें।
किसी भी न्यूरोलॉजिकल लक्षण को हल्के में न लें।
की-होल (Keyhole) ब्रेन सर्जरी क्या होती है?
की-होल ब्रेन सर्जरी न्यूरोसर्जरी की एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें मस्तिष्क के ऑपरेशन के लिए बहुत छोटा चीरा और खोपड़ी में छोटा-सा छिद्र बनाया जाता है। विशेष माइक्रोस्कोप, एंडोस्कोप और आधुनिक उपकरणों की सहायता से सर्जन मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से तक सुरक्षित रूप से पहुंचते हैं।
इस तकनीक के प्रमुख लाभ हैं—
छोटा चीरा और कम रक्तस्राव।
आसपास के सामान्य ऊतकों को कम नुकसान।
ऑपरेशन के बाद दर्द अपेक्षाकृत कम।
संक्रमण का जोखिम कम।
मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है।
अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम हो सकती है।
हालांकि, हर मरीज में की-होल सर्जरी संभव नहीं होती। इसका निर्णय बीमारी के प्रकार, आकार, स्थान और मरीज की स्थिति को ध्यान में रखकर न्यूरोसर्जन द्वारा किया जाता है।
एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी क्या है? क्या यह पारंपरिक ऑपरेशन से बेहतर है?
एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन की एक अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है। इसमें लगभग 8–10 मिलीमीटर के छोटे चीरे से एक विशेष कैमरा (एंडोस्कोप) और सूक्ष्म उपकरणों की मदद से ऑपरेशन किया जाता है।
यह तकनीक विशेष रूप से स्लिप डिस्क, नस दबने (Pinched Nerve) और रीढ़ की कुछ चुनिंदा समस्याओं में प्रभावी हो सकती है।
इसके प्रमुख लाभ हैं—
बहुत छोटा चीरा
मांसपेशियों को न्यूनतम नुकसान
कम रक्तस्राव
ऑपरेशन के बाद दर्द अपेक्षाकृत कम
मरीज जल्दी चल-फिर सकता है
सामान्य गतिविधियों में अपेक्षाकृत जल्दी वापसी संभव होती है
ध्यान रहे कि हर स्पाइन मरीज के लिए एंडोस्कोपिक सर्जरी उपयुक्त नहीं होती। किस मरीज के लिए कौन-सी तकनीक सबसे बेहतर होगी, इसका निर्णय जांच और विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही किया जाता है।
डॉ. कुंज बिहारी कहते हैं कि दिमाग और रीढ़ की अधिकांश बीमारियों का सफल इलाज आज उपलब्ध है, बशर्ते मरीज समय पर विशेषज्ञ तक पहुंचे। डर, भ्रम और घरेलू इलाज में समय गंवाने के बजाय सही समय पर जांच और उपचार कराना सबसे समझदारी भरा कदम है। याद रखिए—समय पर किया गया इलाज न केवल जीवन बचाता है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर बनाता है।
अगर आपके मन में न्यूरोसर्जरी से जुड़े कोई सवाल हैं या सुझाव लेना हो तो कृप्या अपने नजदीकी उजाला सिग्नस अस्पताल
से संपर्क करें। आप हमारे हेल्थ एक्सपर्ट्स ले askadoctor@ujalacygnus.com
पर संपर्क कर सकते हैं या डॉ कुंज बिहारी
सारस्वत से अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं।
FAQ
न्यूरोसर्जन से कब परामर्श लेना चाहिए
?
जब सिर में गंभीर चोट, ब्रेन हेमरेज, ब्रेन ट्यूमर, स्लिप डिस्क या रीढ़ की हड्डी में कोई समस्या हो, तो डॉक्टर की सलाह पर न्यूरोसर्जन से मिलना चाहिए।
क्या न्यूरोसर्जन के पास जाने का मतलब हमेशा ऑपरेशन ही होता है
?
नहीं, न्यूरोसर्जन दवाओं और अन्य गैर-शल्य चिकित्सा तरीकों से भी कई गंभीर बीमारियों का इलाज करते हैं, और ऑपरेशन की जरूरत केवल विशेष मामलों में ही पड़ती है।
मस्तिष्क की सर्जरी से पहले किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है
?
सर्जरी से कुछ दिन पहले डॉक्टर खून को पतला करने वाली दवाएं (जैसे एस्पिरिन) बंद करने की सलाह देते हैं और जरूरी जांचें (जैसे एमआरआई या सीटी स्कैन) साथ लाने को कहते हैं।
क्या न्यूरोसर्जरी में केवल मस्तिष्क की सर्जरी शामिल होती है
?
नहीं, न्यूरोसर्जरी में संपूर्ण तंत्रिका तंत्र शामिल होता है. इसमें मस्तिष्क के अलावा रीढ़ की हड्डी और शरीर की परिधीय तंत्रिकाएं (peripheral nerves) भी शामिल होती हैं।
क्या न्यूरोसर्जरी हमेशा खुले ऑपरेशन (ओपन सर्जरी) के जरिए होती है?
नहीं, आधुनिक चिकित्सा में कई प्रक्रियाएं न्यूनतम आक्रामक (minimally invasive) तकनीकों से की जाती हैं. इसमें छोटे चीरों और उन्नत सूक्ष्मदर्शी (microscopes) का उपयोग किया जाता है जिससे ऊतकों को कम नुकसान होता है और मरीज जल्दी ठीक होता है।
Loading...























