
पथरी, हर्निया और पेट की बीमारियां: जानिए कब जरूरी हो जाती है सर्जरी?
By Priyambda Sahay
Reviewed by : Ujala Cygnus
September 28, 2026
आजकल पेट से जुड़ी समस्याएँ आम होती जा रही हैं। बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण पित्त की थैली की पथरी, हर्निया, अपेंडिक्स, बवासीर, फिशर और फिस्टुला जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य मानकर उपचार टाल देते हैं, जबकि समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें
,
समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है
उजाला अस्पताल के जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. सौरभ मिश्रा बताते हैं कि पेट से जुड़ी किसी भी समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार पेट दर्द या भारीपन, बार-बार गैस, अपच या एसिडिटी, पेट में गांठ या सूजन, मलद्वार से खून आना या दर्द, कब्ज अथवा मल त्याग में परेशानी जैसे लक्षणों में विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। वहीं अचानक तेज पेट दर्द और उल्टी जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो सकती है। ऐसी बीमारियों के लिए दूरबीन से सर्जरी (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) एक बेहतर विकल्प है। उन्होंने इस संदर्भ में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिये हैं।
पेट की किन समस्याओं को न करें नजरअंदाज और कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
?
पेट के इन लक्षणों को नजरअंदाज करने की बजाए डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करना बेहतर विकल्प होता है। अगर पेट में लगातार दर्द या भारीपन, बार-बार गैस,अपच या एसिडिटी, पेट में गांठ या सूजन (हर्निया का संकेत), मलद्वार से खून आना या दर्द, कब्ज या मल त्याग में तकलीफ और अचानक तेज पेट दर्द व उल्टी (आपातकालीन स्थिति) हो तो डॉक्टर से तत्काल मिलें।
कब सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है
?
हर पथरी, हर्निया या पेट की समस्या में सर्जरी जरूरी नहीं होती। उपचार का निर्णय बीमारी की स्थिति, लक्षणों और चिकित्सकीय जाँच के आधार पर किया जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि पेट से जुड़ी किसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करें। लंबे समय तक बीमारियों को अनदेखा करने पर ज्यादातर मामलों में केवल सर्जरी का विकल्प ही रह जाता है। सभी उजाला सिग्नस के अस्पतालों में लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी, लैप्रोस्कोपिक एपेंडेक्टॉमी, हर्निया सर्जरी, बवासीर, फिशर और फिस्टुला की सर्जरी सहित विभिन्न उपचार उपलब्ध हैं। इसके अलावा आंत्र छिद्र (बॉवेल परफोरेशन) तथा पेट और छाती की चोट जैसी आपातकालीन स्थितियों में भी सर्जिकल उपचार किया जाता है।
दूरबीन विधि से सर्जरी के क्या फायदे हैं
?
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को आम भाषा में दूरबीन से होने वाली सर्जरी कहा जाता है। इसमें बड़े चीरे के बजाय छोटे चीरे के माध्यम से कैमरा और विशेष उपकरणों की सहायता से ऑपरेशन किया जाता है। डॉ. सौरभ मिश्रा के अनुसार, मरीजों में इस तकनीक से छोटा चीरा, कम दर्द और अपेक्षाकृत जल्दी सामान्य गतिविधियों में लौटने का लाभ मिल सकता है।
डॉ सौरभ मिश्रा का कहना है कि पेट की समस्या को सहते रहना इलाज नहीं है। सही समय पर जांच, सही विशेषज्ञ और सही उपचार ही बेहतर एवं सुरक्षित रिकवरी की दिशा में पहला कदम है।
क्या पेट में गांठ या मलद्वार से खून आना हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत है
?
नहीं, लेकिन इन्हें बिना जांच के सामान्य मान लेना भी उचित नहीं है।
पेट में गांठ या सूजन हर्निया का संकेत हो सकती है। वहीं मलद्वार से ताजा लाल रक्त बवासीर में भी दिखाई दे सकता है, जबकि फिशर में दर्द और रक्तस्राव दोनों हो सकते हैं। लेकिन यही लक्षण दूसरी पाचन संबंधी बीमारियों में भी देखे जा सकते हैं। इसलिए खासकर बार-बार होने वाले रक्तस्राव, लगातार दर्द या बदलती bowel habits को विशेषज्ञ द्वारा जांचना जरूरी है।
जनरल सर्जरी के बाद मरीज कितनी जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है
?
जनरल सर्जरी के बाद रिकवरी का समय बीमारी, सर्जरी के प्रकार, मरीज की उम्र और सामान्य स्वास्थ्य तथा किसी जटिलता की मौजूदगी पर निर्भर करता है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का उद्देश्य छोटे चीरे और कम ऊतक क्षति के माध्यम से प्रभावी उपचार करना है, जिससे कई उपयुक्त मरीजों में अस्पताल में रहने की अवधि और सामान्य गतिविधियों में वापसी का समय कम हो सकता है।
ध्यान रखें
पेट में लगातार दर्द, बढ़ती गांठ या सूजन, मलद्वार से रक्तस्राव, अथवा अचानक तेज दर्द और उल्टी को नजरअंदाज न करें। समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने से बीमारी की सही पहचान और उचित उपचार की दिशा तय की जा सकती है।
अगर आपके पास भी पथरी, हर्निया या सामान्य सर्जरी से जुड़े सवाल हैं,तो अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में जनरल सर्जन से सलाह लें, या हमारे विशेषज्ञों से जुड़ने के लिए askadoctor@ujalacygnus.com पर ईमेल करें और से अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहाँ डॉ. सौरभ मिश्रा करें।
FAQs
पेट की किन समस्याओं में डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए
?
लगातार पेट दर्द या भारीपन, बार-बार गैस, अपच या एसिडिटी, पेट में गांठ या सूजन, मलद्वार से खून आना, दर्द, कब्ज या मल त्याग में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार या बार-बार होने वाले लक्षणों में विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।
पेट से जुड़ी कौन-कौन सी समस्याएँ आजकर आम हो गई हैं
?
अजकल बदलती जीवनशैली के साथ पित्त की थैली में पथरी, हर्निया, अपेंडिक्स, बवासीर, फिशर और फिस्टुला जैसी समस्याएँ आम तौर पर देखी जाने लगी हैं। इनके अलावा पाचन संबंधी कई अन्य समस्याएँ भी हैं, जिनके लिए सही समय पर जाँच और उपचार आवश्यक है।
क्या पेट की समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करना ठीक है
?
नहीं। कुछ लक्षण सामान्य लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक बने रहने या बार-बार होने पर इनके कारणों की जांच जरूरी है। समय पर जांच और उचित उपचार से संभावित जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है और किन समस्याओं में इसका उपयोग किया जाता है
?
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी एक न्यूनतम चीरा वाली सर्जिकल तकनीक है, जिसमें बड़े चीरे के बजाय छोटे चीरे के माध्यम से सर्जरी की जाती है। पित्त की थैली की पथरी, अपेंडिक्स और कुछ प्रकार के हर्निया जैसी स्थितियों में इसका उपयोग किया जा सकता है। सर्जरी की उपयुक्तता मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करती है।
अचानक तेज पेट दर्द और उल्टी होने पर क्या करना चाहिए
?
अचानक तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी या तेजी से बिगड़ती स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी हो सकता है, क्योंकि इसके पीछे ऐसी समस्या हो सकती है जिसके लिए तुरंत जांच और उपचार की आवश्यकता हो।
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