
हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल: दिल के लिए खतरनाक कॉम्बिनेशन
By Priyambda Sahay
Reviewed by : Ujala Cygnus
हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या अक्सर एक साथ देखने को मिलती है, क्योंकि इनके कई जोखिम कारक एक जैसे होते हैं। अनहेल्दी खान-पान, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और आनुवंशिक कारण इन दोनों समस्याओं को बढ़ावा देते रहते हैं।
दरअसल जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, तो धमनियों के अंदर फैटी जमाव बनने लगते हैं, जिन्हें प्लाक कहा जाता है। समय के साथ ये प्लाक खून की नसों को संकरा कर देते हैं, जिससे खून का प्रवाह बाधित होने लगता है। ऐसे में दिल को पूरे शरीर में खून पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, और इसी वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। अगर किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल दोनों एक साथ हों, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
आज की बदलती जीवनशैली में ये समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताना और शारीरिक गतिविधि की कमी आज कल आम समस्या बन गई है। इसके साथ ही फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता सेवन भी शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इसके अलावा लगातार तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, शराब का सेवन और बढ़ता मोटापा भी हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल के मामलों में बढ़ोतरी के बड़े कारण हैं। चिंताजनक बात यह है कि अब ये समस्याएं सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि कम उम्र के युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रही हैं।
उजाला सिग्नस जेके के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मोहन लाल इनसे जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब दिये हैं।
1. हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल के मुख्य कारण क्या हैं? क्या ये आपस में जुड़े हुए हैं?
हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल दिल से जुड़ी बीमारियों के प्रमुख जोखिम कारक हैं और अक्सर साथ-साथ पाए जाते हैं। इसके पीछे कई समान कारण होते हैं, जैसे अनहेल्दी डाइट, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, तनाव, खराब नींद की आदतें और आनुवंशिक कारण। डायबिटीज़ जैसी बीमारियां भी इनका खतरा बढ़ा सकती हैं।
ये दोनों स्थितियां एक-दूसरे से जुड़ी भी होती हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से धमनियों में प्लाक जमा होने लगता है, जिससे नसें संकरी और कठोर हो जाती हैं। इससे खून का बहाव प्रभावित होता है और दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। जब ये दोनों समस्याएं साथ हों, तो दिल की बीमारी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
2. जीवनशैली में ऐसे कौन से बदलाव किए जा सकते हैं जिनसे ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक तरीके से कम किया जा सके?
डॉ. मोहन लाल के अनुसार, जीवनशैली में बदलाव इन दोनों समस्याओं को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। शरीर का संतुलित वजन बनाए रखना, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना, धूम्रपान से दूर रहना और शराब का सीमित सेवन करना दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। इसके अलावा तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाना और पर्याप्त नींद लेना भी महत्वपूर्ण है।
खान-पान का भी इसमें बड़ा योगदान होता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए ताजे फल और सब्जियां, साबुत अनाज जैसे ओट्स और ब्राउन राइस, मछली, दालें और फलियां जैसे हल्के प्रोटीन और मेवे व बीज जैसे हेल्दी फैट को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। वहीं तली-भुनी चीजें, ज्यादा नमक, मीठे पेय और प्रोसेस्ड मीट का सेवन कम करना बेहतर रहता है।
3. ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए कितना व्यायाम जरूरी है?
आमतौर पर सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी जाती है, यानी लगभग रोजाना 30 मिनट की कसरत। इसके लिए तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी, जॉगिंग या योग जैसे विकल्प अच्छे माने जाते हैं।
नियमित कसरत से दिल मजबूत होता है, खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम होता है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ता है। साथ ही यह ब्लड प्रेशर को भी संतुलित रखने में मदद करती है।
4. हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल के लिए दवा कब शुरू करनी चाहिए?
अगर जीवनशैली में बदलाव के बावजूद ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ रहे या कोलेस्ट्रॉल का स्तर काफी ज्यादा हो, तो डॉक्टर दवा शुरू करने की सलाह दे सकते हैं। जिन लोगों को डायबिटीज़, मोटापा या दिल की बीमारी का पारिवारिक इतिहास है, उन्हें भी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि, अगर शुरुआत में ही सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो कई मामलों में दवाओं की जरूरत कम हो सकती है या उनकी मात्रा घटाई जा सकती है। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं बंद करना या उनकी खुराक बदलना बिल्कुल सही नहीं है।
5. अगर इन समस्याओं को कंट्रोल न किया जाए, तो क्या खतरे हो सकते हैं?
अगर हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल को समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो ये कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेलियर, किडनी डैमेज और पेरिफेरल आर्टरी डिजीज जैसी बीमारियां शामिल हैं।
समय के साथ ये स्थितियां खून की नसों और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
अगर आपके हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर से जुड़े कोई खास सवाल हैं, तो कृपया अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस हॉस्पिटल या हमारे हेल्थ एक्सपर्ट्स से askadoctor@ujalacygnus.com पर संपर्क करें या अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहां क्लिक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल आपस में जुड़े हैं?
हां, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल आपस में जुड़े हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से नसों में प्लाक जम जाता है, जिससे नसें सिकुड़ जाती हैं; ऐसे में दिल को ज़्यादा ज़ोर लगाकर खून पंप करना पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
2. युवाओं में ये बीमारियां इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रही हैं?
सुस्त जीवनशैली, खराब खान-पान, तनाव और बढ़ता मोटापा—ये कुछ मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से अब युवा आबादी भी इन बीमारियों की चपेट में आ रही है।
3. क्या जीवनशैली में बदलाव करके ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है?
हां, जीवनशैली में बदलाव करके ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। हेल्दी खाना, रोज़ाना कसरत, वज़न कंट्रोल, तनाव कम करना और धूम्रपान छोड़ना, ये सभी चीज़ें दिल की सेहत को काफी बेहतर बना सकती हैं।
4. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए कितनी कसरत ज़रूरी है?
एक्सपर्ट्स हर हफ़्ते 150 मिनट तक हल्की-फुल्की कसरत करने की सलाह देते हैं, जैसे पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या योग करना।
5. अगर हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नज़रअंदाज़ किया जाए, तो क्या होता है?
अगर इनका इलाज न किया जाए, तो इनसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और किडनी खराब होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिससे सेहत से जुड़े बड़े खतरों का जोखिम बढ़ जाता है।
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